मुझे ऐसा बना दो मेरे पिता
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मुझे ऐसा बना दो मेरे पिता ,
जीवन में लगे ठोकर न कहीं ,
जाने अनजाने भी मुझ से ,
नुकसान किसी का हो न कहीं ,
उपकार सदा करता जाऊँ ,
दुनिया अपकार भले ही करें ,
बदनामी न हो जग में मेरी ,
कोई नाम भले ही दे न कहीं मुझे ,
मुझे ऐसा बना दो मेरे पिता ,
जीवन में लगे ठोकर न कहीं ,
जाने अनजाने भी मुझ से ,
नुकसान किसी का हो न कहीं।
जो तेरा बन कर रहता है ,
काँटों में फूल - सा खिलता है ,
कितने भी कांटे पॉंव में चुभे ,
पर फूल भी हो कांटे न कहीं ,
मुझे ऐसा बना दो मेरे पिता ,
जीवन में लगे ठोकर न कहीं ,
जाने अनजाने भी मुझ से ,
नुकसान किसी का हो न कहीं ।
मन हो मधुपूर्ण कलश मेरा ,
आँखों में ज्योति छलकती हो ,
तुम से मधु ऐसा पीने को ,
जगता ही रहूं , सोऊँ न कहीं ,
मुझे ऐसा बना दो मेरे पिता ,
जीवन में लगे ठोकर न कहीं ,
जाने अनजाने भी मुझ से ,
नुकसान किसी का हो न कहीं।
मैं क्या हूँ , राह मेरी क्या है ,
यह सत्य सदा मैं समझ सकूँ ,
इस राह पर चलते - चलते कभी,
मेरे पॉंव थके न रुके न कहीं ,
मुझे ऐसा बना दो मेरे पिता ,
जीवन में लगे ठोकर न कहीं ,
जाने अनजाने भी मुझ से ,
नुकसान किसी का हो न कहीं।
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