मेहराँ दा छीट्टा
दे मेहरा दा छीटटा मेरी माँ ,
दे दर्शन एक बार माँ ,
यह मन भँवरा मंडराता ,
आया मेरी माँ ,
दे मेहराँ दा छीटटा मेरी माँ ,
दे दर्शन एक बार माँ।
तू माँ अम्बे आप भवानी ,
कंचन कर दे काया ,
लाखों पापी पत्थर तर गए ,
तेरे वृक्ष की छाया।
भवसागर में डूबती नैया ,
तूं ही कर दे पर माँ ,
दे मेहरा दा छीटटा मेरी माँ ,
दे दर्शन एक बार माँ ।
गंगा माँ तेरे चरणों में ,
मैं मल - मल के नहाऊं ,
अंदर मेरे घोर पड़ा मैं ,
न जानू तेरी महिमा।
दे मेहरा दा छीटटा मेरी माँ ,
दे दर्शन एक बार माँ।
सूरज , चाँद - सितारे चमकन ,
चमको तेरी ज्योति ,
पाओ खुशियां मेरी झोली में ,
आयी तेरे द्वार माँ ,
दे मेहरा दा छीटटा मेरी माँ ,
दे दर्शन एक बार माँ ।
आइयां खुशियां तो दुःख ,
सब दूर हो गया माँ।।
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