वन्दना
नव दीप जलें , नव फूल खिलें ,
रोज माँ का आशीर्वाद मिले।
कभी ना हो दुखों का सामना ,
पग पग माँ दुर्गा का आशीर्वाद मिले।
हर रोज़ मिले मौका नए पल जीने का ,
ऐसा माँ का आशीर्वाद मिले।
हर मोड़ हर लम्हा रहे माँ का साथ ,
ऐसी हमें तकदीर मिले।
जय माता दी जय माता दी।
सतगुरु तेरी वन्दना करती पाप विनाश ,
वचना अमृत का पान कर चंचलता मिट जात ,
तेज मेरे सतगुरु का चनन नालों वध के ,
सिवा आया चंद दी ता घर रौशनी सतगुरु ,
पूर्ण रूप विच आया रबी जोत मेरा ,
सतगुरु हे जागदा सब दे मन नू भगवान,
उह माता है जिस जन्म दिता इस चनन नू ,
नी होर किते नहीं लभना जिस माँ ने यह पुत जाया।
सादा वाना मेरे सतगुरु दा नाले बोलदे ने मिठो ,
बोली जो कोई सवाली दर ते आये भर देवे उसकी झोली।
चरणां विच पदम् रेखा ताहियो भजदी है पीछे -पीछे माया ,
तेज मेरे सतगुरु का चनन नालों वध के .
जो कोई द्वारे आवे सतगुरु दे नहीं चुभदे दुखां वाले सुये।
जो कोई पावे प्रेम गुरु नाल खुल जांदे बैकुण्ठा दे बूहे तुसी ,
आके देखो बहनों मैं तँ दासी ने अजमाया।
तेज मेरे सतगुरु का चनन नालों वध के।
जो कुछ अक्खी देखिया असां की कहिये ,
अपनी जवानी रूप धार के आये सतगुरु ,
एहना बरगा कोई शानी।
दुःख सारे दूर होये जदों सतगुरु दर्शन पाया।
तेज मेरे सतगुरु का चनन नालों वध के।
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