गुरुवार, 7 अप्रैल 2022

जग जननी पहाड़ों वाली माँ

जग जननी पहाड़ों वाली माँ  

जग जननी पहाड़ों वाली माँ 

चाहे जिंदगी में कितनी भी परेशानी  ,

देती है माँ शक्ति उनसे लड़ने की , 

बस मेरी विनती है माँ ,

भरदे ख़ाली झोली खुशियों से माँ ,

जय माता दी 

मईया हमें न बिसारयो ,

चाहे लाख भक्त मिल जाहीं 

हम सम तुम को बहुत माँ। 

तुम सम हमको नाही।। 

    भक्तों की लाज रखो माँ भवानी ,

    मेरे घर आजा तेरी मेहरबानी ,

    मेरे घर आजा तेरी मेहरबानी। 

    जग जननी पहाड़ां वाली माँ ,

    कभी भक्तों के घर आ जाओ ,

    कभी भक्तों के घर आ जाओ ,

    अपने ही दिए हुए अन्न जल का ,

    कभी खुद ही भोग लगा जाओ ,

    जग जननी पहाड़ां वाली माँ ,

    जग जननी पहाड़ां वाली माँ। 

इस घर में हमारा कुछ भी नहीँ ,

जो कुछ भी है माँ सभ कुछ तेरा है ,

चाहे दुःख है यहाँ चाहे सुख की घडी ,

चाहे रौशनी चाहे अँधेरा है 

हम चाकर बन कर सेवा करें ,

हम चाकर बन कर सेवा करें ,

बन मालिक हुसन जगा जाओ ,

जग जननी पहाड़ां वाली माँ। 

    अपने ही दिए हुए अन्न जल का। 

    यहाँ विदुर का माँ कुछ साग भी है ,

    कुछ श्रद्धा का सागर उमड़ा हुआ ,

    कुछ भक्ति लगन अनुराग भी है ,

    कुछ तुम भी अपने चरणों का , 

    कुछ तुम भी अपने चरणों का ,

    हमें अमृत पान करा जाओ ,

    जग जननी पहाड़ां वाली माँ ,

    जग जननी पहाड़ां वाली माँ। 

घर अपना बनालो इस घर में ,

हम मिल जुल कर रहेंगे ,

तेरी ममता की छाव में अम्बे ,

कुछ सुन लेंगे कुछ कह लेंगे ,

माँ बच्चों के पावन रिश्ते की ,

माँ बच्चों के पावन रिश्ते की ,

कुछ झलक हमें दिखला जाओ ,

जग जननी पहाड़ां वाली माँ ,

जग जननी पहाड़ां वाली माँ। 

    भक्तों की लाज रखो माँ भवानी ,

    मेरे घर आजा तेरी मेहरबानी ,

    मेरे घर आजा तेरी मेहरबानी। 


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