नयनों में बसा ली तेरी मूर्ति
जय माता दी जय माता दी
नयनों में बसा ली तेरी मूर्ति ,
मूर्ति आं माँ तेरी मूर्ति ,
मूर्ति आं माँ तेरी मूर्ति ,
नयनों में बसाली तेरी मूर्ति ,
आँखों में बसाली तेरी मूर्ति ,
नयनों में बसाली तेरी मूर्ति ,
आँखों में बसाली तेरी मूर्ति ,
एक छोटा सा मन में मंदिर बना -बना,
उसमे सजा ली तेरी मूर्ति ,
नयनों में बसाली तेरी मूर्ति ,
आँखों में बसाली तेरी मूर्ति ,
माँ तेरी मूर्ति , माँ तेरी मूर्ति , माँ तेरी मूर्ति ,
जय माँ , जय माँ , जय माँ ,
नाम तेरे की माला अम्बे , फिरती है मेरी नस - नस में ,
होता वही जो इछा है तेरी सभ कुछ तेरे ही वश में ,
होता वही जो इस्छा है तेरी सभ कुछ तेरे ही वश में ,
क्या है फर्क जग रूठे या माने , मैंने है मना ली तेरी मूर्ति ,
नयनों में बसा ली तेरी मूर्ति ,
नयनों में बसा ली तेरी मूर्ति ,
मूर्ति और माँ तेरी मूर्ति ,
मूर्ति और माँ तेरी मूर्ति ,
ऑंखें बन्द करके अपने ,
मैं मन में तुझको निहारा करता हूँ ,
मैं तेरी आरती उतारा करता हूँ ,
मन ही मन में सर को झुकाकर ,
माथे से लगा ली तेरी मूर्ति ,
नयनों में बसाली तेरी मूर्ति ,
इक छोटा सा मन में मंदिर मिला ,
और उसमें सजा ली तेरी मूर्ति ,
मूर्ति और माँ तेरी मूर्ति ,
मूर्ति और माँ तेरी मूर्ति।।
जय माता दी
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