मेरी बांके बिहारी से अँखियाँ लड़ी
मेरी बांके बिहारी से अँखियाँ लड़ी।
चाहे फांसी लगे या लगे हथकड़ी।।
सखी गोकुल नगरिया को जाऊंगी मैं ,
प्रेम घर उनके दर पै बनाउंगी मैं।
वहां कीर्तन करूंगी खड़ी ही खड़ी ,
मेरी बांके बिहारी से अँखियाँ लड़ी।
चाहे फांसी लगे या लगे हथकड़ी।।
तेरी बांकी अदा ने क्या जादू किया ,
मेरी आँखों में घर है तेरा पिया।
तेरे नैनो से नैनो मिलें हर घड़ी,
मेरी बांके बिहारी से अँखियाँ लड़ी।
चाहे फांसी लगे या लगे हथकड़ी।।
मैंने जोड़ लिया रिस्ता श्री गोबिंद से ,
मन भवराँ बंधा है चरण डोर से।
मेरे नैनों से हरदम लगी है झड़ी ,
मेरी बांके बिहारी से अँखियाँ लड़ी।
चाहे फांसी लगे या लगे हथकड़ी।।
मेरी विनती बिहारी जी सुन लीजिये ,
अपने चरणों को दासी बना लीजिये।
छोड़ के सारे बंधन चरण में पड़ी ,
मेरी बांके बिहारी से अँखियाँ लड़ी।
चाहे फांसी लगे या लगे हथकड़ी।।
मेरी बांके बिहारी से अँखियाँ लड़ी।
चाहे फांसी लगे या लगे हथकड़ी।।
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