मेरे बांके बिहारी का दरबार बड़ा सोहना
जिंदगी में कभी भी कहीं भी ,
अपने किसी हुनर पर घमंड मत करना।
क्यूंकि पत्थर जब पानी में गिरता है,
तो अपने ही बजन से गिरता है।
जब भी परदा उठता है , दीदार बड़ा सोहना है ,
जब भी दर्शन खुलता है , दीदार बड़ा सोहना है ,
मेरे बांके बिहारी का दरबार बड़ा सोहना है।
मेरे बांके बिहारी की सूरत बड़ी भोली है ,
यहाँ रोज दश्हरा है यहाँ रोज दिवाली है ,
जो भी दिल को खींच लेता , यहाँ रोज दिवाली है ,
जो भी दिल को खींच लेता , दिलदार बड़ा सोहना है ,
मेरे बांके बिहारी का दरबार बड़ा सोहना है।
ऐ मान सरोवर है यहाँ पर मोती मिलते है ,
मुरझाये हुए चेहरे यहाँ आकर खिलते हैं ,
यह घाटे का सौदा नहीं व्यापार बड़ा सोहना है ,
मेरे बांके बिहारी का दरबार बड़ा सोहना है।
मेरे कुंडला वाले दी , बड़ी शान निराली है ,
यह दुनिया का मालिक है , यह दुनिया निराली है ,
इस के पीले - पीताम्बर दो , कुण्डला वाले दा शृंगार बड़ा सोहना है ,
जब भी दर्शन खुलता है , दीदार बड़ा सोहना है ,
मेरे बांके बिहारी का दरबार बड़ा सोहना है।
हमें श्याम से ऐसे नहीं मिलाया , सतगुर ने मिलाया है ,
यहाँ आने का रास्ता मेरे गुरु ने दिखाया है ,
मेरे सतगुरु प्यारे दा उपकार बड़ा सोहना है ,
मेरे बांके बिहारी का दरबार बड़ा सोहना है ,
मेरे बांके बिहारी का दरबार बड़ा सोहना है।
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