Bhajan kirtan Lyrics भजन भक्ति गीत हैं जो देवी-देवताओं के प्रति हमारे सम्मान और श्रद्धा को दर्शाते हैं। हिंदू धर्म में, भजन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साम वेद में भजन और प्रार्थनाएं हैं। भजन हमें चिकित्सीय प्रभाव प्रदान कर सकते हैं। वे हमारे भावनात्मक बंधन में सुधार कर सकते हैं और हमें भावनात्मक रूप से स्थिर बनाए रख सकते हैं।जब हम भजन गाते हैं, तो यह डोपामाइन के रिलीज में मदद करते है। भजन हमारे विश्लेषणात्मक कौशल में सुधार करते हैं और हमें अधिक चौकस बनाते हैं। यह हमारी जागरूकता बढ़ाते है।
मंगलवार, 30 जुलाई 2024
Ayenge Bhole Baba Mandir Saja ke Rakhna
शनिवार, 27 जुलाई 2024
TERE DAMRU KI DHUN - SHIV JI BHAJAN
TERE DAMRU KI DHUN
मंगलवार, 26 सितंबर 2023
Ganpati Vandhana (गणपति वन्दना )
गणपति वन्दना
आओ गणपति जी आन पधारो कीर्तन की सब तैयारी है ,
आओ आओ गणपति आओ हमको बाट तुम्हारी है।
माथे तेरे तिलक बिराजे - गल फूलों की माला ,
लम्बोदर कहलाते हो तुम - तेरा रूप निराला है।
लम्बोदर कहलाते हो तुम - मूसे की सवारी है।
पिता तुम्हारे भोले शंकर - गोरां तुम्हारी माता है ,
सुना तुम्हारे द्वार से कोई - खाली हाथ न जाता है।
तुमने सब भक्तों को तारा - आज हमारी बारी है।
भक्तों की तो विनती सुन लो गणपति प्यारो आयो है,
जय - जयकार करो गणपति की सबको मन हर्षाये है ,
बरसेगा अब रस भक्तों में मंडल महिमा गायो हैं।।
आओ आओ गणपति आओ हमको बाट तुम्हारी है।
बुधवार, 28 सितंबर 2022
Durga Path 13 Adhayay
Durga Path 13 Adhayay
दुर्गा स्तुति 13 अधयाय

तुम्हे महातम देवी का मैंने दिया सुनाए।
आदि भवानी का बड़ा है जग में प्रभाओ।
तुम भी मिल कर वैश्य से देवी के गुण गाओ।
शरण में पड़ो तुम भी जगदम्बे की।
करो श्रद्धा से भक्ति माँ अम्बे की।
यह मोह ममता सारी मिटा देवेगी।
सभी आस तुम्हारी पूजा देवेगी।
तुझे ज्ञान भक्ति से भर देवेगी।
तेरे काम पुरे यह कर देवेगी।
सभी आसरे छोड़ गुण गाइयो।
भवानी की ही शरण में आइओ।
स्वर्ग मुक्ति भक्ति को पाओगे तुम।
जो जगदम्बे को ही ध्याओगे तुम।
दोहा:- चले राजा और वैश्य यह सुनकर सब उपदेश ।
आराधना करने लगे बन में सहे क्लेश ।
मारकंडे बोले तभी सुरत कियो ताप घोर ।
राज तपस्या का मचा चहु और से शोर ।
नदी किनारे वैश्य ने डेरा लिया लगा ।
पूजने लगे वह मिटटी की प्रीतिमा शक्ति बना ।
कुछ दिन खा फल को किया तभी निराहार।
पूजा करते ही दिए तीन वर्ष गुजार।
हवन कुंड में लहू को डाला काट शरीर।
रहे शक्ति के ध्यान में हो आर अति गंभीर।
हुई चंडी प्रसन्न दर्शन दिखाया।
महा दुर्गा ने वचन मुह से सुनाया।
मै प्रसन्न हु मांगो वरदान कोई।
जो मांगोगे पाओगे तुम मुझ से सोई।
कहा राजा ने मुझ को तो राज चाहिए।
मुझे अपना वही तख़्त ताज चाहिए।
मुझे जीतने कोई शत्रु ना पाए।
कोई वैरी माँ मेरे सन्मुख ना आये ।
कहा वैश्य ने मुझ को तो ज्ञान चाहिए ।
मुझे इस जन्म में ही कल्याण चाहिए ।
दोहा:- जगदम्बे बोली तभी ,
राजन भोगो राज ।
राज करोगे कल्प भर ,
वैश्य तुम्हे मै देती हु,
जिसके पाने से ही,
इतना कहकर भगवती ,
दोनों भक्तो का किया ,
नव दुर्गा के पाठ का ,
जगदम्बे की कृपा से ,
माता की अदभुत कथा,
सिंह वाहिनी दुर्गा से,
मन वांछित फल पाए ।
अपना ही तुम ताज ।
सूर्य से लेकर जन्म,
ऐ राजन सुखधाम ।
ज्ञान का वह भंडार ।
तुम होगे भव से पार ।
हो गई अंतरध्यान ।
दाती ने कल्याण ।
तेरहवां यह अध्याय ।
भाषा लिखा बनाये ।
'चमन' जो पढ़े पढाये ।
ब्रह्मा विष्णु शिव सभी धरे दाती का ध्यान ।
शक्ति से शक्ति का ये मांगे सब वरदान ।
अम्बे आध भवानी का यश गावे संसार ।
अष्टभुजी माँ अम्बिके भरती सदा भंडार ।
दुर्गा स्तुति पाठ से पूजे सब की आस ।
सप्तशती का टीका जो पढ़े मान विश्वास ।
अंग संग दाती फिरे रक्षा करे हमेश ।
दुर्गा स्तुति पढने से मिटते 'चमन' क्लेश ।
बोलिए जय माता दी जी।
जैकारा शेरावाली माई दा।
बोल सांचे दरबार की जय।
Durga Stuti 12 Adhayay
Durga Stuti 12 Adhayay
दुर्गा स्तुति 12 अधयाय

द्वादश अध्याय में है माँ का आशीर्वाद।
सुनो राजा तुम मन लगा देवी देव संवाद।
महालक्ष्मी बोली तभी करे जो मेरा ध्यान।
निशदिन मेरे नामो का जो करता है गान।
बाधाये उसकी सभी करती हु मै दूर।
उसके ग्रह सुख सम्पति भर्ती हु भरपूर।
अष्टमी नवमी चतुर्दर्शी करके एकाग्रचित।
मन कर्म वाणी से करे पाठ जो मेरा नित।
उसके पाप व् पापो से उत्पन्न हुए क्लेश।
दुःख दरिद्रता सभी मै करती दूर हमेश।
प्रियजनों से होगा ना उसका कभी वियोग।
उसके हर एक काम में दूँगी मै सहयोग।
शत्रु, डाकू, राजा और शस्त्र से बच जाये।
जल में वह डूबे नहीं न ही अग्नि जलाए।
भक्ति पूर्वक पाठ जो पढ़े या सुने सुनाये।
महामारी बिमारी का कष्ट ना कोई आये।
जिस घर में होता रहे मेरे पाठ का जाप।
उस घर की रक्षा करू मेट सभी संताप।
ज्ञान चाहे अज्ञान से जपे जो मेरा नाम।
हो प्रसन्न उस जीव के करू मै पुरे काम।
नवरात्रों में जो पढ़े पाठ मेरा मन लाये।
बिना यतन कीने सभी मनवांछित फल पाए।
पुत्र पौत्र धन धाम से करू उसे सम्पन्।
सरल भाषा का पाठ जो पढ़े लगा कर मन।
बुरे स्वपन ग्रह दशा से दूँगी उसे बचा।
पढ़ेगा दुर्गा पाठ जो श्रधा प्रेम बढ़ा।
भुत प्रेत पिशाचिनी उसके निकट ना आये।
अपने द्रढ़ विश्वास से पाठ जो मेरा गाए।
निर्जन वन सिंह व्याघ से जान बचाऊ आन।
राज्य आज्ञा से भी ना होने दू नुक्सान।
भवर से भी बाहर करू लम्बी भुजा पसार।
'चमन' जो दुर्गा पाठ पढ़ करेगा प्रेम पुकार।
संसारी विपत्तिय देती हु मै टाल।
जिसको दुर्गा पाठ का रहता सदा ख्याल।
मैं ही रिद्धि -सीधी हु महाकाली विकराल।
मै ही भगवती चंडिका शक्ति शिवा विशाल।
भरों हनुमत मुख्य गण है मेरे बलवान।
दुर्गा पाठी पे सदा करते क्रपा महान।
इतना कह कर देवी तो हो गई अंतरध्यान।
सभी देवता प्रेम से करने लगे गुणगान।
पूजन करे भवानी का मुह माँगा फल पाए।
'चमन' जो दुर्गा पाठ को नित श्रधा से गाए।
वरदाती का हर समय खुला रहे भंडार।
इच्छित फल पाए 'चमन' जो भी करे पुकार।
इक्कीस दिन इस पाठ को कर ले नियम बनाये।
हो विश्वास अटल तो वाकया सिद्ध हो जाये।
पन्द्रह दिन इस पाठ में लग जाये जो ध्यान।
आने वाली बात को आप ही जाए जान।
नौ दिन श्रधा से करे नव दुर्गा का पाठ।
नवनिधि सुख सम्पति रहे वो शाही ठाठ।
सात दिनों के पाठ से बलबुद्धि बढ़ जाये।
तीन दिनों का पाठ ही सारे पाप मिटाए।
मंगल के दिन माता के मन्दिर करे ध्यान।
'चमन' जैसी मन भावना वैसा हो कल्याण।
शुद्धि और सच्चाई हो मन में कपट ना आये।
तज कर सभी अभिमान न किसी का मन कलपाये।
सब का कल्याण जो मांगेगा दिन रैन।
काल कर्म को परख कर करे कष्ट को सहन।
रखे दर्शन के लिए निस दिन प्यासे नैन।
भाग्यशाली इस पाठ से पाए सच्चा चैन।
द्वादश यह अध्याय है मुक्ति का दातार।
'चमन' जीव हो निडर उतरे भव से पार।
बोलो जय माता दी।
जय मेरी माँ वैष्णो रानी की।
जय मेरी माँ राज रानी की।
जय जय माँ , मेरी भोली माँ।
जय जय माँ, मेरी प्यारी माँ।
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